अपने कनिष्ठ साथी आशिष शर्मा की शादी में शामिल होने अपनी पत्नी के साथ मझगंवा पहुंचे तो, वहां से हम लोगों ने भगवान राम की तपोभूमि चित्रकूट का भी दर्शन किया। उस समय के कुछ चित्र। ताकि कभी यह यात्रा विस्मृत होने लगे तो ये चित्र उसकी याद दिलाते रहें।
भगवान श्री राम की तपोभूमि और शेरशाह शूरी की कर्मभूमि ब्याघ्रसर यानी बक्सर (बिहार) के पास गंगा मैया की गोद में बसे गांव मझरिया की गलियों से निकलकर रोजगार की तलाश में जब मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल आया था तब मैंने सोचा भी नहीं था कि पत्रकारिता मेरी रणभूमि बनेगी। वर्ष 2002 में भोपाल में अपने दोनों छोटे भाईयों विनय और स्व.ब्रजेश (पूर्व रणजी खिलाड़ी) के भविष्य की खातिर यहां रूकना पड़ा। समय काटने की गरज से अपने एक व्यवसायी जानकार की सिफारिश पर मैंने दैनिक राष्ट्रीय हिन्दी मेल से पत्रकारिता जगत में प्रवेश किया। उसके बाद अन्य कई बड़े अखबारों में काम करने के आफर आए लेकिन स्वाभिमानी प्रवृति का होने के कारण मैं कहीं नहीं जा सका। वर्ष 2005 में जब सांध्य अग्रिबाण भोपाल से शुरू हुआ तो मध्यप्रदेश की पत्रकारिता के महानायक श्री अवधेश बजाज जी की क्षत्रछाया में कुछ कर गुजरने की कोशिश की। वह तो कुछ दिनों बाद अग्रिबाण छोड़कर चले गए लेकिन मैं आज भी वहीं जमा हुआ हूं। --------विनोद उपाध्याय
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